परामर्श के क्षेत्र

पहले प्रश्न को समझा जाता है, फिर उपयुक्त विधि चुनी जाती है।

प्रश्न के अनुसार परामर्श में ज्योतिष, वास्तु, कर्मकाण्ड और आध्यात्मिक अध्ययन का उपयोग किया जाता है। पहला निवेदन विषय समझाने तक सीमित रखें और संवेदनशील अभिलेख न भेजें।

प्रश्न → समीक्षा → व्यवस्था → परामर्श

शिव-पार्वती की छवि के साथ पारम्परिक अनुष्ठानिक वातावरण।
पारम्परिक अनुष्ठान और सार्वजनिक धार्मिक परिवेश।

परामर्श की संरचना

स्पष्ट प्रश्न, उपयुक्त विधि और सीधी व्यवस्था।

  • पहले प्रश्न निवेदन का प्रारम्भ उसी विषय से होता है जिस पर विवेकपूर्ण निर्णय चाहिए।
  • फिर विधि ज्योतिष, वास्तु, कर्मकाण्ड या आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रश्न के अनुसार चुना जाता है।
  • सीधी व्यवस्था निवेदन स्वीकृत होने पर समय, शुल्क और माध्यम सीधे तय किए जाते हैं।
JYOTISH ज्योतिष और जीवन के महत्वपूर्ण काल किसके लिए: जब मुख्य प्रश्न समय, कठिन चरण, परिवर्तन या कई विकल्पों के बीच निर्णय का हो।

सामान्य प्रश्न

  • यह काल किस प्रकार का है?
  • दबाव अभी क्यों बढ़ा है?
  • परिवर्तन तुरंत किया जाए या तैयारी के बाद?

क्या जाँचा जाता है: जन्म-विवरण, ग्रह-दशाएँ, प्रासंगिक गोचर और वास्तविक निर्णय या उत्तरदायित्व।

बाद में आवश्यक जानकारी: सटीक जन्म-तिथि, समय और स्थान स्वीकृति के बाद तभी माँगे जाते हैं जब वे प्रश्न के लिए आवश्यक हों।

परामर्श-माध्यम: विषय और स्थान के अनुसार परामर्श ऑनलाइन, टेलीफोन या प्रत्यक्ष रूप से तय होता है।

ज्योतिष निर्णय को स्पष्ट कर सकता है; वह घटना की गारंटी या व्यक्तिगत उत्तरदायित्व का स्थान नहीं लेता।

निजी परामर्श हेतु निवेदन
FAMILY व्यक्तिगत और पारिवारिक निर्णय किसके लिए: सम्बन्ध, दायित्व, गृह-परिवर्तन, शिक्षा, विवाह-चर्चा या लम्बे पारिवारिक तनाव से जुड़े प्रश्न।

सामान्य प्रश्न

  • कठिन निर्णय को किस क्रम में देखा जाए?
  • कौन-से दायित्व पहले हैं?
  • समस्या समय, संवाद या गहरे मतभेद में कहाँ है?

क्या जाँचा जाता है: तत्काल तथ्य, परिवार की भूमिकाएँ, समय और आवश्यक होने पर सीधे जुड़े व्यक्तियों का ज्योतिषीय सन्दर्भ।

बाद में आवश्यक जानकारी: पहले निष्पक्ष सार लिखें। आरोप, निजी संदेश या पहचान-पत्र न भेजें।

परामर्श-माध्यम: पहला परामर्श स्थान और आवश्यकता के अनुसार ऑनलाइन, टेलीफोन या प्रत्यक्ष रूप से तय होता है।

गम्भीर कानूनी, चिकित्सकीय, सुरक्षा या मानसिक-स्वास्थ्य विषय में उपयुक्त विशेषज्ञ आवश्यक है।

निजी परामर्श हेतु निवेदन
ENTERPRISE व्यवसाय और कार्यक्षेत्र के विषय किसके लिए: भूमिका-परिवर्तन, साझेदारी, उत्तराधिकार, विस्तार, नियुक्ति, स्थानान्तरण या बड़े परिणाम वाले निर्णय।

सामान्य प्रश्न

  • क्या वर्तमान काल विस्तार के अनुकूल है?
  • परिवर्तन किस क्रम में किया जाए?
  • प्रतिबद्धता से पहले किन जोखिमों को देखना चाहिए?

क्या जाँचा जाता है: निर्णय, उत्तरदायित्व, समय, विकल्प और आवश्यक होने पर मुख्य निर्णयकर्ताओं का ज्योतिषीय सन्दर्भ।

बाद में आवश्यक जानकारी: पहले केवल निर्णय और समय-सीमा का सार दें। अनुबन्ध, खाते या गोपनीय योजना न भेजें।

परामर्श-माध्यम: निर्णय की जटिलता के अनुसार परामर्श ऑनलाइन या प्रत्यक्ष रूप से तय होता है।

यह कानूनी, कर, निवेश, लेखा या प्रबन्धन-परामर्श नहीं है।

निजी परामर्श हेतु निवेदन
VASTU घर, कार्यस्थल और संस्थानों का वास्तु किसके लिए: चयन, निर्माण, उपयोग, परिवर्तन या पुनर्विचार में चल रही सम्पत्ति के लिए।

सामान्य प्रश्न

  • स्थल चुनने से पहले क्या देखा जाए?
  • योजना के किन भागों पर ध्यान हो?
  • बिना अनावश्यक तोड़फोड़ के क्या सुधार सम्भव हैं?

क्या जाँचा जाता है: दिशा, विन्यास, कमरों का उपयोग, प्रवेश, आवागमन, आसपास की स्थितियाँ और भवन का वास्तविक उद्देश्य।

बाद में आवश्यक जानकारी: कार्य-सीमा तय होने के बाद आवश्यक नक्शा, दिशाएँ, चित्र और स्थल-विवरण निश्चित किए जाते हैं।

परामर्श-माध्यम: प्रारम्भिक बातचीत ऑनलाइन होती है। प्रत्यक्ष आकलन आवश्यक होने पर स्थल-भ्रमण तय किया जाता है।

वास्तु वास्तुकार, संरचनात्मक अभियन्ता, भवन नियम, अग्नि-सुरक्षा या विधिक जाँच का स्थान नहीं लेता।

निजी परामर्श हेतु निवेदन
KARMAKAND वैदिक कर्म और कर्मकाण्ड किसके लिए: किस अवसर पर कौन-सा कर्म उचित है, क्या तैयारी चाहिए और विधि कैसे सम्पन्न होगी।

सामान्य प्रश्न

  • अवसर के लिए कौन-सा अनुष्ठान उपयुक्त है?
  • परिवार या संस्था को क्या तैयारी करनी होगी?
  • अनुष्ठान घर, संस्था या अन्य स्थल पर हो सकता है?

क्या जाँचा जाता है: उद्देश्य, परिवार या संस्था का सन्दर्भ, समय, स्थान, सहभागी, सामग्री और विधिक क्रम।

बाद में आवश्यक जानकारी: पहले अवसर, स्थान और पसन्दीदा तिथि साझा करें। विस्तृत आवश्यकताएँ सहमति के बाद तय होती हैं।

परामर्श-माध्यम: प्रत्यक्ष उपस्थिति वाले अनुष्ठानों में यात्रा और स्थानीय व्यवस्था सहित अलग समय तय किया जाता है।

किसी कर्म को स्वास्थ्य, विवाह, सन्तान, कानूनी विजय या आर्थिक सफलता की गारंटी नहीं कहा जाता।

निजी परामर्श हेतु निवेदन
SPIRITUAL आध्यात्मिक अभ्यास और दिशा किसके लिए: नियमित अध्ययन, दैनिक आचार, मन्त्र-अभ्यास या सामान्य जीवन में साधना के स्थान से जुड़े प्रश्न।

सामान्य प्रश्न

  • दैनिक अभ्यास टिकाऊ कैसे बने?
  • वर्तमान अवस्था में कौन-सा अध्ययन उपयुक्त है?
  • परिवार और कार्य के दायित्वों के साथ अभ्यास कैसे चले?

क्या जाँचा जाता है: वर्तमान अभ्यास, पूर्व शिक्षा, दायित्व, क्षमता और मार्गदर्शन चाहने का कारण।

बाद में आवश्यक जानकारी: वर्तमान अभ्यास और कठिनाई का सार दें। दीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री सार्वजनिक रूप से न लिखें।

परामर्श-माध्यम: परामर्श बातचीत से आरम्भ होता है और केवल उपयोगी बने रहने तक आगे चलता है।

गूढ़ शिक्षा को प्रदर्शन, त्वरित शक्ति या स्थिर आचरण के विकल्प के रूप में नहीं दिया जाता।

निजी परामर्श हेतु निवेदन
CONTINUING निरन्तर परामर्श किसके लिए: कुछ विषय एक बैठक में स्पष्ट हो जाते हैं; कुछ में निश्चित अन्तराल पर पुनरवलोकन उपयोगी होता है।

सामान्य प्रश्न

  • पहले परामर्श के बाद क्या बदला?
  • कौन-से संकल्प पूरे हुए?
  • अगले चरण में क्या अलग प्रकार का मार्गदर्शन चाहिए?

क्या जाँचा जाता है: प्रगति, बदली परिस्थितियाँ और निकट आता निर्णय।

बाद में आवश्यक जानकारी: सहमति वाले पुनरवलोकन से सम्बन्धित जानकारी ही आवश्यक है।

परामर्श-माध्यम: आवृत्ति प्रत्येक विषय के अनुसार तय होती है। कोई स्वतः सदस्यता या आवर्ती पैकेज नहीं है।

निरन्तर सम्पर्क तभी उचित है जब वह उपयोगी और स्पष्ट सीमा में रहे।

निजी परामर्श हेतु निवेदन

निवेदन कैसे आगे बढ़ता है

  1. प्रश्न विषय, अभी मार्गदर्शन की आवश्यकता और कोई प्रासंगिक समय-सीमा लिखें।
  2. समीक्षा परामर्श स्वीकार होने से पहले प्रश्न पर विचार किया जाता है।
  3. व्यवस्था माध्यम, समय, शुल्क और आवश्यक जानकारी सीधे तय होती है।
  4. परामर्श सहमत विषय और सीमाओं के भीतर परामर्श आगे बढ़ता है।

अपने प्रश्न से सबसे निकट क्षेत्र चुनें।

आपका चयन निवेदन-फॉर्म में पहले से भरा रहेगा और आगे बढ़ने से पहले बदला जा सकता है।

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